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village life

भालू

भालू से भिडंत

By देवेन्द मेवाड़ी on January 26, 2011

‘‘ददा हुए गंगा सिंह नयाल। तब चौबीस-पच्चीस के रहे होंगे। मुझसे चार-पांच साल बड़े थे। शिकार का उन्हें भी गजब ही शौक हुआ। एक दिन गांव से दो-तीन शिकारी निकले। सामने उस जंगल में शिकार करने। वहां सबने अपना-अपना रास्ता पकड़ा होगा। कोई इधर को गया, कोई उधर को। ददा कुजा की झाड़ियों में झुक-झुक [...]

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बाज्यू , बाघ और बंदूक

बाज्यू , बाघ और बंदूक

By देवेन्द मेवाड़ी on January 25, 2011

तो सुनो, एक दिन क्या हुआ कि बाज्यू ने काकड़ की कांक्-कांक् की आवाज सुनी। जानते हो , काकड़ खाली नहीं बासता (बोलता) है। श्यूं-बाघ आसपास होने पर बासता है।’’ ‘‘हां, कार्बेट ने भी अपनी किताब में लिखा है कि बाघ वगैरह देख कर काकड़ बोलने लगता है,’’ मैंने कहा तो उन्होंने अपना किस्सा आगे [...]

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नाई गांव से एक दृश्य

पहाड़ और माल-भाबर

By देवेन्द मेवाड़ी on January 24, 2011

पिछली बार जब नाई गांव में था तो अस्सी-पचासी वर्ष के खीम सिंह जी से भेंट हुई। नाई नयाल लोगों का गांव है। घर के पास पहुंचे तो देखा खीम सिंह जी आंगन के एक कोने में ताश खेलने में रमे हुए थे। उन्होंने हाथ घुमाकर पत्ता फेंका, ‘‘ये लो इक्का! ’’  फिर पत्ते समेटते [...]

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Avatars by Sterling Adventures

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