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दिल्ली से तुंगनाथ वाया नागनाथ-16
रामगंगा पीछे छूट चुकी थी और गगास आगे आने वाली थी। हम उनके बीच के पहाड़ पार कर रहे थे। तभी, इन दोनों नदियों के बारे में एटकिंसन के गजट में छपी वह किंवदंती याद हो आई…एक बार देवताओं ने निश्चय किया कि द्वारा में रहें। इसके लिए पवित्र प्रयाग का होना जरूरी था। तो, [...]
दिल्ली से तुंगनाथ वाया नागनाथ-15
दिवालीखाल से कुछ देर उतराई में चलने के बाद गाड़ी गैरसैंण पहुंच गई। गैरसैंण! लोगों की आशाओं की भावी राजधानी। वही गैरसैंण जहां से कभी राजा कल्याण चंद और गढ़वाल के राजा की सेनाओं ने एक होकर दुश्मन से लोहा लेने के लिए कैड़ारौ की ओर कूच किया था। और, वही गैरसैंण जो गढ़वाल और [...]
दिल्ली से तुंगनाथ वाया नागनाथ-14
हम अंधेरे में कर्णप्रयाग-गैरसैंण मार्ग पर आगे बढ़ रहे थे। दिन भर की यात्रा से थक चुके थे। बाहर कुछ दिखाई नहीं दे रहा था। इसलिए गाड़ी के भीतर बैठे-बैठे यों ही इधर-उधर की चर्चा करने लगे। मैं साथियों को पहले ही बता चुका था कि इस मार्ग से मैं पहले भी जा चुका हूं [...]
दिल्ली से तुंगनाथ वाया नागनाथ-13
तुंगनाथ में 12,750 फुट की ऊंचाई पर इस वीराने में ये कव्वे यहां क्या कर रहे हैं? उन्हें देख कर आश्चर्य हो रहा था। इधर-उधर सैकड़ों फुट गहरी खाई और उसके ऊपर हवा में पर तौलते, गोता लगाते ये काले, चमकीले कव्वे! लगता है ये हमारे आम पहाड़ी कव्वे (कोर्वस राइंकास) नहीं बल्कि रेवन (कोर्वस [...]
दिल्ली से तुंगनाथ वाया नागनाथ-12
अब ऊपर चोटी थी और बुग्याल से नीचे पेड़ों की कतार यानी ‘ट्री-लाइन’। प्रकृति अपनी रची हुई हर चीज का कितना ध्यान रखती है, देख कर हैरान रह जाना पड़ता है। दस-बारह हजार फुट की ऊंचाई पर पेड़-पौधे खड़े नहीं रह सकते, इसलिए उन्हें बुग्यालों से नीचे रोक दिया है। पहाड़ की मिट्टी तेज हवाओं, [...]
दिल्ली से तुंगनाथ वाया नागनाथ-11
सी-सी यानी कंक्रीट-सीमेंट की सर्पीली सड़क पर चलते गए, चलते गए। ऊपर और ऊपर। दम-खम के साथ कि देखो कैसे चमाचम चल रहे हैं हम। अभी थोड़ी ही चढ़ाई पार की थी कि एक विदेशी युवक और युवती से भेंट हो गई। साइमन और सीएरा। वे दोनों तुंगनाथ शिखर से लौट रहे थे। उत्साह के [...]
दिल्ली से तुंगनाथ वाया नागनाथ-10
गोपेश्वर से खाली पेट चले थे। यहां तक कि रास्ते में कहीं चाय भी नहीं पी थी। केवल फेफड़े जम कर जंगल की ठंडी और आॅक्सीजन से भरपूर शुद्ध हवा का आनंद ले रहे थे। इसलिए उतरते ही साथियों ने छोले, आलू पराठे और चाय का आर्डर दिया। दूकान के आगे खड़े होकर चारों ओर [...]
दिल्ली से तुंगनाथ वाया नागनाथ-9
तभी मंडल गांव का मील का पत्थर दिखाई दिया। एक गधेरे के ऊपर से पुल पार कर घने जंगल के रास्ते पर आगे बढ़ने लगे। जंगल घना और घना होता जा रहा था। उसमें कोई आबादी नहीं थी। गाड़ी की खुली खिड़की से कभी-कभी घने जंगल की भीगी-भीगी खुशबू भीतर आ जाती थी। चलते चले [...]
दिल्ली से तुंगनाथ वाया नागनाथ-8
नौ मई को दोपहर बाद सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। समारोह में अपने-अपने क्षेत्र में समर्पित रूप से जीवन भर कार्य करने वाली पहाड़ की 10 जानी-अनजानी विभूतियों को पारंपरिक टोपी और शाल पहना कर सार्वजनिक रूप से सम्मानित किया गया। ये विभूतियां थींः श्रीमती संग्रामी देवी, श्रीमती जयन्ती देवी, श्रीमती लक्ष्मीदेवी जितवान, श्री [...]
दिल्ली से तुंगनाथ वाया नागनाथ-7
अगला कार्यक्रम इन पहाड़ों के पार 69 किमी. दूर गोपेश्वर में था। इसलिए 3 बजे हम लोग वापस घाटी के नीचे कर्णप्रयाग लौटे और वहां से नंदप्रयाग, चमोली मार्ग पर सीधे गोपेश्वर की ओर बढ़ चले। मैठाणा गांव से निकलते समय फिर सड़क किनारे खिले नीली गुलमोहर के पेड़ों ने हमारा स्वागत किया। चमोली से [...]

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