उर्फ बड़े मियां, छोटे मियां सुभान अल्लाह!
छोटे मियां तो देश का नाम दुनिया में रौशन कर ही रहे हैं, बड़े मियां ने भी अपने हुनर का करिश्मा दिखा कर छोटे मियां के नाम एक आम कर दिया है। सुभान अल्लाह, बड़े मियां।
मलिहाबाद के बड़े मियां पद्मश्री जनाब हाजी कलीम उल्ला खान कई साल से छोटे मियां मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर का क्रिकेट में कमाल देख कर उन्हें कुछ ऐसा तोहफा देना चाहते थे कि सचिन का नाम सदा बना रहे और चाहने वाले भी वाह, वाह! वाह, वाह! करते रहें। तो, आम की कलम के कारीगर हाजी कलीम उल्ला खान ने तय कर लिया कि वे चौसा आम की एक नई लाजवाब किस्म तैयार करेंगे और उसका नाम क्रिकेट के बेमिसाल खिलाड़ी सचिन के नाम पर रख देंगे। तय किया और कर दिखाया! चौसा आम के क्राॅस से उन्होंने उसकी एक और नई किस्म तैयार कर ली है और उसका नाम रखा है- सचिन। चाहने वाले जब-जब चौसा की इस किस्म के आम चखेंगे, तब-तब सचिन को याद करेंगे।
इतना ही नहीं, खबर यह भी है कि कलीम उल्ला साहब ने इस लजीज आम का लुत्फ़ उठाने के लिए सचिन तेंदुलकर को अपना पैगाम भी भेज दिया है। उन्हें छोटे मियां का इंतजार रहेगा।
और, 72 वर्ष के बागवां कलीम उल्ला खान साहब? आम के एक ही दरख्त में कलमें बांध कर 300 किस्म के आम तैयार करने वाले हाजी कलीम उल्ला खान के मुरीदों की भी कोई कमी नहीं। ‘कलम’ के करिश्मे के लिए उन्हें भारत सरकार की ओर से पद्मश्री से तो नवाजा ही गया है, मुरीदों की भी उन्हें बेपनाह मुहब्बत मिली है। ‘कलम’ के इस कारीगर के लिए कलमकार हरीश चंद्र पांडे ने क्या खूब लिखा है, कि उनकी कलम चूसने को जी करता है। मुलाहिजा फरमाइएः
‘ सब कुछ दिल्ली में ही नहीं सोचा जा सकता
कुछ मलीहाबाद में भी सोचा जा सकता है
कुछ ऐसे जैसे कि दशहरी आम के पेड़ पर
क्या फलाया जा सकता है लंगड़ा आम
क्या आम्रपाली के साथ फलाया जा सकता है बंबइया
क्या विलायती, देशी, अब्दुल हक़, चौसा, रामकेला,
पुखराज, बंगलौरा
सबकी सब प्रजातियां फलाई जा सकती हैं,
एक साथ, एक पेड़ पर
कुछ ऐसा ही सोचता है कलीम उल्ला खान
इस छोटी सी जगह मलीहाबाद में।’
– हरीश चंद्र पांडे
यानी, मुहावरे को अब चाहे आप ‘बड़े मियां तो बड़े मियां…’ कहें या फिर ‘छोटे मियां तो छोटे मियां… ’ दोनों अपने हुनर में लाजवाब। सुभान अल्लाह!



daajyu twele aam ke baarema acch likh chu