मंगल ग्रह इन दिनों हमारी पृथ्वी के काफी करीब है। पृथ्वी से उसकी दूरी इन दिनों केवल 9.8 किमी. रह गई है। कल, आज और और कल यानी 27, 28, 29 जनवरी 2010 को सूर्यास्त के बाद पूर्व से आसमान में आगे बढ़ते नारंगी-लाल रंग के मंगल ग्रह को आसानी से पहचाना जा सकता है। बल्कि, वैज्ञानिकों का कहना है कि 29 जनवरी 2010 को मंगल सर्वाधिक चमकदार दिखाई देगा। उसकी चमक आसमान के सबसे चमकदार तारे ‘सिरियस’ यानी व्याध (लुब्धक) से बस नाममात्र को ही कम होगी। नीली आभा लिए लुब्धक, नारंगी-लाल मंगल और श्वेत चंद्रमा को एक साथ देखना एक अपूर्व अनुभव होगा।
मंगल ग्रह प्राचीनकाल से ही मानव का ध्यान आकर्षित करता रहा है। हमारी पौराणिक कथाओं में इसे पृथ्वी का पुत्र माना गया है। शिव पुराण में कहा गया है कि यह शिव के पसीने की बूंद से पैदा हुआ और देवता बन कर आकाश में स्थापित हो गया। रोम और यूनान के प्राचीन निवासी लाल रंग के कारण इसे युद्द का देवता मानते थे।
लोग सदियों तक इसे भले ही युद्ध और क्रोध के लिए कोसते रहे हों लेकिन वैज्ञानिक अध्ययनों ने साबित कर दिया कि मंगल भी हमारी पृथ्वी की तरह एक ठोस ग्रह है। यह सूर्य से लगभग 22.80 करोड़ किमी. दूर है। वह सूर्य की परिक्रमा बिल्कुल गोल नहीं बल्कि अंडाकार पथ पर करता है। इसलिए कभी तो सूर्य से लगभग 24.90 करोड़ किमी. दूर हो जाता है और कभी सूर्य से उसकी दूरी केवल करीब 20.70 करोड किमी. रह जाती है।
मंगल के गोले का व्यास 6,794 किमी. है। वह अपनी धुरी पर 24 घंटे, 37 मिनट और 22.1 सेकेंड में घूम जाता है। उसका एक दिन हमारी पृथ्वी के 1.026 दिन के बराबर होता है। वह सूर्य की परिक्रमा हमारी पृथ्वी के दिनों के हिसाब से 686.98 दिन में करता है। यानी, उसका एक वर्ष हमारे 2 वर्षों से भी बड़ा होता है। मंगल ग्रह का दिन में अधिकतम औसत तापमान 27 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम औसत तापमान शून्य से 133 डिग्री सेल्सियस तक नीचे होता है।
मंगल का सबसे ऊंचा पहाड़ है ‘ओलिंपस मोंस’ जिसकी ऊंचाई 24 किमी. है। उस पर एक 4000 किमी. चौड़ा और 10 किमी. ऊंचा पठार है। उसकी ‘वेलीज मेरिनेरिस’ घाटी 4000 किमी. लंबी और 2-7 किमी. गहरी है। दक्षिणी गोलार्ध में ‘हेलाज प्लेनिटिया’ नामक विशाल क्रेटर है जिसकी चौड़ाई 2000 किमी. और गहराई लगभग 6 किमी. है। मंगल की सतह पर मैदान, पहाड़ और घाटियां हैं। वहां धूल के भयंकर तूफान उठते रहते हैं। दोनों ध्रुवों पर पानी की बर्फ और जमी हुई कार्बन डाइऑक्साइड की टोपियां हैं। मंगल का वायुमंडल बहुत ही विरल है। उसमें 95.3 प्रतिशत कार्बन डाइऑक्साइड, 2.7 प्रतिशत नाइट्रोजन, 1.6 प्रतिशत आर्गन, सूक्ष्म मात्रा में (0.15 प्रतिशत) ऑक्सीजन तथा जल (0.03 प्रतिशत) पाया जाता है।
मंगल के दो चांद हैं : फोबस और डीमोस। फोबस पश्चिम से उगता है और दिन में दो बार पूर्व में ढलता है। डीमोस बहुत छोटा-सा चांद है। भारतीय वैज्ञानिक भविष्य में मंगल अभियान की योजना बना रहे हैं।


BAHOT ACCHI JANKARI HAI DHANYWAD=)