3 responses to “पक गए होंगे काफल-1”

  1. काफल को सरसों के तेल में सान कर खाना याद आ गया। बेहतरीन।

  2. आपका लेख पढ़ याद आया कि काफल खाए जमाना बीत गया है। अब पहाड़ में आए बदलाव की सुनकर तो लगता है कि पहाड़ पहले जैसे नहीं रहे। पेड़, फल व पानी ही जब नहीं रहा तो न जाने कैसे पहाड़ होंगे?
    घुघूती बासूती

  3. काफल खाये जाने कितने साल हो गये दाज्यू, नराई लग रही है, सुना है कि मसूरी की तरफ आये हैं करके। इस छनचर-इतवार को जाके चाता हूं पैं।
    दिगौऽऽऽऽ काफल।

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