6 responses to “हमरि होलि”

  1. welcome ,happy holi

  2. Is sansmaran ko padhana bada achha laga! Sasneh swagat hai!

  3. Bahut khoobsoorteese likha gaya hai yah sansmaran!

  4. अहा, पुरानी होली की याद दिला दी, जब पिसी हल्दी में तिब्बत से मंगाया गया खास सुहागा मिलाकर लाल रंग बनाया जाता था और बांस की पिचकारी बनाई जाती थी।
    गांव के पटांगण में पूरा गांव इकट्ठा होता था और गांव के पधान ज्यू सबसे पहले सभी लोगों पर बांश की पिचकारी से रंग डालते थे और उसके बाद सब गांव वाले रंग खेलना शुरु करते थे।

  5. कली बेंच देगें चमन बेंच देगें,

    धरा बेंच देगें गगन बेंच देगें,

    कलम के पुजारी अगर सो गये तो

    ये धन के पुजारी वतन बेंच देगें।

    हिंदी चिट्ठाकारी की सरस और रहस्यमई दुनिया में राज-समाज और जन की आवाज “जनोक्ति “आपके इस सुन्दर चिट्ठे का स्वागत करता है . . चिट्ठे की सार्थकता को बनाये रखें .

  6. इस नए चिट्ठे के साथ आपका हिंदी ब्‍लॉग जगत में स्‍वागत है .. नियमित लेखन के लिए शुभकामनाएं !!

Leave a Reply