चार्ल्स डार्विन का जन्म 12 फरवरी 1809 को श्रुस्बरी, इंगलैंड में हुआ था। उन्होंने प्राकृतिक वरण से जातियों के विकास का सिद्धांत प्रस्तुत किया, जिसने प्रकृति के बारे में हमारे पूरे सोच को बदल दिया। विकासवाद के इस सिद्धांत को विश्व भर में व्यापक स्वीकृति मिली। इस नए क्रांतिकारी विचार के कारण धार्मिक कट्टरपंथियों में खलबली मच गई और वे डार्विन का विरोध करने लगे। उसके विचारों को उन्होंने ईश्वरीय सत्ता पर चोट माना। लेकिन, विज्ञान सत्य की राह पर आगे बढ़ता है, इसलिए सच की विजय हुई। विकासवाद को सर्वत्र स्वीकृति मिल गई।
डार्विन के जन्म दिन पर मुझे आज उनकी आत्म कथा के कई अंश याद आ रहे हैं। उनकी इस पुस्तक के हिंदी संस्करण का संपादन करते समय मुझे उनकी कई बातों ने छू लिया था। अपनी आत्मकथा में वे लिखते हैं, ‘‘ 3 अगस्त, 1878। मैंने अपने जीवन के चित्रण का कार्य 28 मई को होपेडेन में (सरे स्थित श्री हेंस्लेवेजवुड के घर में) शुरू किया था, और उसके बाद से इसे प्रायः प्रतिदिन दोपहर में लगभग एक घंटे लिखता रहा हूं। ’’
बचपन में डार्विन ने पौधों का नामकरण करने की कोशिश की और सीपियों, मोहरों, सिक्कों का संग्रह किया। उन्हें अलग-अलग तरह की किताबें पढ़ने का बहुत शौक था। वे घंटों बैठ कर शेक्सपियर, के ऐतिहासिक नाटक पढ़ा करते थे। थामसन की ‘‘सीजन’ जैसी कविताएं और बायरन व स्काॅट की नई-नई कविताएं पढ़ते थे। उन्हें एक लड़के से ‘वंडर्स ऑफ द वल्र्ड’ पुस्तक पढ़ने को मिली। वे लिखते हैं, ‘‘ मेरे विचार से सबसे पहले इसी किताब ने मुझमें सुदूर क्षेत्रों के भ्रमण की इच्छा पैदा की जो अंततोगत्वा बीगल की यात्रा से पूरी हुई।… ’’
उन्होंने यह भी लिखा है कि जीव विज्ञान के प्रोफेसर डाॅ. ग्रांट ने एक दिन टहलते समय लैमार्क के विकास के सिद्धांत की प्रशंसा के पुल बांध दिए… ‘‘ जहां तक मुझे याद है उनकी बातों का मेरी सोच पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा। उससे पहले मैं अपने दादा की लिखी हुई ‘जूनोमिया’ पुस्तक पढ़ चुका था, जिसमें वैसे ही विचार व्यक्त किए गए थे। मुझ पर उनका कोई प्रभाव नहीं पड़ा था। लेकिन, यह संभव है। कि अपने जीवन के प्रारंभिक दिनों में इस तरह के विचारों को जानने और उनकी प्रशंसा सुनने का प्रभाव मेरी कृति ‘ओरिजिन आॅफ स्पीशिज’ के रूप में एक अलग ढंग से प्रकट हुआ हो।’’
आत्मकथा में एक स्थान पर उन्होंने लिखा है, ‘‘ किसी कवि को अपनी पहली कविता प्रकाशित होने पर उतनी खुशी नहीं हुई होगी जितनी मुझे स्टीफेन की ‘इलस्ट्रेशंस आॅफ ब्रिटिश इंसेक्ट्स’ में छपे इन जादुई शब्दों को देख कर हुई- चार्ल्स डार्विन द्वारा पकड़े गए।’’
वे ‘बीगल’ नामक समुद्री जहाज की यात्रा को अपने जीवन की बहुत बड़ी घटना मानते हुए लिखते हैं ‘‘ बीगल की यात्रा मेरे जीवन की सबसे महत्वपूर्ण घटना थी और उसने मेरा पूरा भविष्य तय कर दिया।’’
विज्ञान के क्षेत्र में उन्हें जो सफलता मिली, डार्विन ने उसके कारण बताते हुए लिखा है, ‘‘ इनमें सबसे महत्वपूर्ण है- विज्ञान के प्रति मेरा प्रेम, किसी विषय पर लंबे समय तक चिंतन करने का असीम धैर्य, तथ्यों को जमा करने और उन पर गौर करने के लिए किया गया परिश्रम, पर्याप्त कल्पनाशीलता और सहज बुद्धि।’’


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