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ये चहचहाते पक्षी
दो दिन से नाई गांव में हूं, नैनीताल से लगभग 100 किमी. दूर पहाड़ में। आसपास खेत हैं, पेड़-पौधे हैं। नीचे बांज, बुरांश, अंयार और कई प्रजातियों के पेड़ों का हरा-भरा जंगल है। उससे नीचे पूरी घाटी चीड़ वनों से ढकी है। उस पार की पहाड़ी पर भी ऊपर तक चीड़ चढ़ आए हैं। सामने, [...]
मिट्ठू मौन हो गया
आपने प्रेमचंद की कहानी ‘आत्माराम’ पढ़ी है? उस कहानी में महादेव सोनार हाथ में पिंजरा लिए चलता तो पिंजरे में बैठा मिट्ठू बोलता रहता- ‘सत् गुरुदत्त शिवदत्त दाता। राम के चरण में चित्त लागा!’ गांव के लोग सुनते तो उन्हे लग जाता कि भोर हो गई है। हमारे समाज में कई मिट्ठू इसी तरह पिंजरों [...]
आओ गौरेया, आओ-3
मां कहती थी, एक बहू थी। वह बहुत दिनों से अपने मायके नहीं गई थी। जब भी अपनी सास से मायके जाने के लिए कहती, सास उसे खूब अनाज देकर कहती- पहले इसे बीन कर साफ करो। फिर जावोगी मायके।…बेचारी सुबह से शाम तक अनाज को बीनती, सूप से फटकती और बांस की डालियों में [...]
आओ गौरेया, आओ-2
हां, तो कैसे बिताया आपने गौरेयाओं के साथ अपना दिन? यों, दिन तो यह गौरेयाओं का था। इसलिए इसे यों भी कहा जा सकता है कि कैसे बिताया गौरेयाओं ने आपके साथ अपना दिन? बात एक ही है। जिस तरह सदियों से हम इन नन्हीं चिड़ियों के साथ रहते आ रहे हैं, वैसे ही ये [...]
विश्व गौरेया दिवस (20 मार्च) आओ गौरेया, आओ-1
19 मार्च। आज कई गौरेयाओं के चहचहाने के साथ सुबह हुई। मेरी बालकनी की मुंडेर उन्हें काफी पसंद है। चंद गमलों में लगे नीम के एक पतले पौधे, बोगनवेलिया, लिली, तुलसी, गुलदाउदी और गुलाब के गिने-चुने पौधों के गुलशन में उन्हें मिट्टी के कटोरों में दाना-पानी भी मिल जाता है। वे दिन में कई बार [...]
गौरेया
मेरी आगे की बालकनी में रोज सुबह गौरेया चहचहाती हैं। सुना है इनका चहचहाना शुभ होता है। होगा ही, क्योंकि गौरेया वहीं तो होंगीं, जहां पेड़-पौधे होंगे। हरियाली होगी। लेकिन, अपनी पिछली बालकनी के लैंपशेड में गौरेया दम्पति के आने का बहुत इंतजार है। सीपियों से बना यह लटकता लैंपशेड न जाने क्यों उन्हें इतना [...]



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