उत्तरायण

हफ्ता पहाड़

‘मेरी कलम’  कुछ दिन चुप रही। आप भी सोचते होंगे क्यों? किलै, मैं था हफ्ता भर पहाड़ में। चौमास के दिन। कहीं कोहरा, कहीं बादल, कहीं झमाझम बारिश। घिंघारू छोटे-छोटे लाल फलों से लदे हुए थे। मेरे गांव में पूजा हुई- लोहाखाम देवता की पूजा। मंदिर तक जातुरी गई। सात-आठ हजार आदमी आए। पहले दिन [...]