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अलविदा गिरदा

जिसके बसते थे प्राण पहाड़ों­ में, जो लिखता था गीत पहाड़ों के, जो बयां करता था दर्द अपनी धरती का, जिसके गीतों­में गूंजते थे पहाड़, जिसकी सांसों­में­बहती थी पहाड़ों की ठंडी बयार, जिसकी हंसी में गूंजती थी पहाड़ी नदियों की कल-कल छल-छल की आवाज, जिसके गीतों से उठती थी जनचेतना की चिंगारी….कहते हैं, वह गिरदा [...]