By देवेन्द मेवाड़ी on November 27, 2011
वही, जो हमारे प्राचीन साहित्य में श्रीकृष्ण का प्रिय वृक्ष माना गया है। और?, आज हमारे वनस्पति विज्ञानियों की भाषा में ऐंथोसिफेलस कदंबा कहलाता है। संस्कृत हो या हिंदी? बांगला हो या गुजराती और मराठी, इन सभी भाषाओं में यह कदंब ही कहलाता है। इतना ही नहीं? तमिल भाषी भी इसे कदंबा या वैल्लाइ और [...]
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By देवेन्द मेवाड़ी on January 26, 2011
‘‘ददा हुए गंगा सिंह नयाल। तब चौबीस-पच्चीस के रहे होंगे। मुझसे चार-पांच साल बड़े थे। शिकार का उन्हें भी गजब ही शौक हुआ। एक दिन गांव से दो-तीन शिकारी निकले। सामने उस जंगल में शिकार करने। वहां सबने अपना-अपना रास्ता पकड़ा होगा। कोई इधर को गया, कोई उधर को। ददा कुजा की झाड़ियों में झुक-झुक [...]
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By देवेन्द मेवाड़ी on January 25, 2011
तो सुनो, एक दिन क्या हुआ कि बाज्यू ने काकड़ की कांक्-कांक् की आवाज सुनी। जानते हो , काकड़ खाली नहीं बासता (बोलता) है। श्यूं-बाघ आसपास होने पर बासता है।’’ ‘‘हां, कार्बेट ने भी अपनी किताब में लिखा है कि बाघ वगैरह देख कर काकड़ बोलने लगता है,’’ मैंने कहा तो उन्होंने अपना किस्सा आगे [...]
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By देवेन्द मेवाड़ी on January 24, 2011
पिछली बार जब नाई गांव में था तो अस्सी-पचासी वर्ष के खीम सिंह जी से भेंट हुई। नाई नयाल लोगों का गांव है। घर के पास पहुंचे तो देखा खीम सिंह जी आंगन के एक कोने में ताश खेलने में रमे हुए थे। उन्होंने हाथ घुमाकर पत्ता फेंका, ‘‘ये लो इक्का! ’’ फिर पत्ते समेटते [...]
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By देवेन्द मेवाड़ी on January 14, 2011
अहा वे भी क्या दिन थे! जब भी ककोड़ में होते, माघ के महीने में वहीं पुश्योंण यानी घुघतिया का त्यार मनाते थे। इसे उतरैंणी भी कहते थे। यह त्यार मकर संक्रांति के दिन पड़ता था। उस दिन लोग आराम करते थे। कोई काम नहीं किया जाता था। गाय-भैसों की सेवा भी गोठ में ही [...]
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By देवेन्द मेवाड़ी on January 13, 2011
दो दिन से नाई गांव में हूं, नैनीताल से लगभग 100 किमी. दूर पहाड़ में। आसपास खेत हैं, पेड़-पौधे हैं। नीचे बांज, बुरांश, अंयार और कई प्रजातियों के पेड़ों का हरा-भरा जंगल है। उससे नीचे पूरी घाटी चीड़ वनों से ढकी है। उस पार की पहाड़ी पर भी ऊपर तक चीड़ चढ़ आए हैं। सामने, [...]
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By देवेन्द मेवाड़ी on October 18, 2010
ब्लू ह्विसलिंग थ्रस यानी हमारी कलचुड़िया इतने करीब आ जाएगी, यह सोचा भी नहीं था। कब से इसकी तस्वीर लेने की कोशिश कर रहा हूं लेकिन यह है कि एक जगह रुकती ही नहीं। हिलती-डुलती रहती है। जब तक कैमरे का बटन दबाऊं, वहां से नदारद हो जाती है। लेकिन, आज शायद यह फोटो खिंचाने [...]
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By देवेन्द मेवाड़ी on October 14, 2010
परखनली में प्राण उगाने वाले शरीर विज्ञानी डॉ. राबर्ट एडवर्ड्स को वर्ष 2010 के चिकित्सा विज्ञान के नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किए जाने की घोषणा से बेहद खुशी हुई। उतनी ही खुशी, जितनी जुलाई 1978 में विश्व की प्रथम परखनली शिशु लुइजे ब्राउन के जन्म की घोषणा से हुई थी। लेकिन, अफसोस यह है कि [...]
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By देवेन्द मेवाड़ी on September 24, 2010
22 सितंबर महान वैज्ञानिक माइकेल फैराडे का जन्मदिन था। अपनी लगन और मेहनत के बल पर कोई गरीबी से उठ कर कैसे सफलता के शिखर पर पहुंच सकता है, इसका सबसे बड़ा उदाहरण है- माइकेल फैराडे। उनके जीवन की कहानी किसी के लिए भी बड़ी प्रेरणा का स्रोत बन सकती है। कुछ समय पहले मैंने [...]
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By देवेन्द मेवाड़ी on September 24, 2010
21 सितंबर महान विज्ञान कथाकार हर्बट जार्ज वेल्स का जन्मदिन था। कुछ समय पहले एक विदेशी चैनल में उनके उपन्यास ‘द वार आॅफ द वर्ल्डस्’ पर आधारित फिल्म देखी थी। ‘क्लासिक्स आॅफ साइंस फिक्शन एंड फैंटेसी लिटरेचर’ (सं. फियोना कैलेघन) में भी उनकी चंद कहानियों का सारांश व समीक्षा पढ़ी। ‘द टाइम मशीन’ व ‘द [...]
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